अध्याय 18: अपशिष्ट जल की कहानी | Wastewater Story

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अपशिष्ट :- किसी भी पदार्थ का प्राथमिक उपयोग करने के बाद जो शेष बचता है, उसे अपशिष्ट कहते है।

उदाहरण के लिए नगरपालिका (घरेलु कचरा ) , जल अपशिष्ट (सिवेज- शारीरिक मल-मूत्र ), रेडियोधर्मी अपशिष्ट इत्यादि
स्वच्छ जल मानवों की मूलभूत आवश्यकता है।जल है तो कल है ” ” यदि जल उपलब्ध है तो आपका भविष्य सुरक्षित है ” 22 मार्च ‘ विश्व जल दिवस ‘ मनाया जाता है।

 

○ अपशिस्ट जल :- घरों का वाहित मल , उधोगों , अस्पतालों , कार्यलयों और अन्य उपयोगों के बाद प्रवाहित किए जाने वाला अपशिष्ट जल होता है।

○ वाहित मल :-

1. कार्बनिक अशुद्धियाँ :- मानव मल , तेल , मूत्र , फल और सब्जी का कचरा आदि।

2. अकार्बनिक अशुद्धियाँ :- नाट्रेट , फॉस्फेट , धातुएँ आदि।

3. पोषक तत्व :- फॉस्फोरस और नाइट्रोजन युक्त पदार्थ आदि

4. जीवाणु :- विब्रियो कोलर एवं स्लमानेला पैराटाइफी आदि।

5. सूक्ष्मजीव :- प्रोटोजोआ आदि

 

 ○ जल शोधन :- घरों की जल की आपूर्ति के लिए सीवर बिछाया जाता हैं। घर का गंदा जल निकासी और मल विसर्जन की व्यवस्था करता है।

 

○ प्रदूषित जल का उपचार :-

• शलाका छनन
• जल अपमथित्र
• वातित द्रव को फिल्टर
• ग्रिट और बालू अलग करने की टँकी

 

○ स्वच्छता और रोग :- स्वच्छता की कमी और संदूषित पेयजल रोगों का कारण बनते है।

○रोग :- हैजा , टायफॉइड , पोलियों , हेपेटाइटिस और पेचिश आदि।

 

 

○ वाहित मल निबटान :- स्वच्छता की स्थिति के लिए , कम लागत के लिए वाहित मल निबटान तंत्रो को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अपने पर्यावरण को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में हम सभी को भूमिका निभानी है।” मानवीय और पथ प्रदर्शक कार्य प्रारंभ करने के लिए किसी को भी किसी दूसरे का मुहँ नही देखना चाहिए। “‘

 

 

 

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