अध्याय 1: राष्ट्र निर्माण की चुनौतियां / Challenges of Nation Building

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नए राष्ट्र की चुनौतियाँ प्रसिद्ध भाषण द्वि-राष्ट्र सिद्धांत अब्दुल गफ्फार खाँ विभाजन की प्रक्रिया विभाजन के परिणाम रजवाड़ों का विलय रजवाड़ो की समस्या इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन राज्यों का पुनर्गठन पोट्टी श्रीरामलू 14 राज्यों एवं 6 संघ शासित

 

 

★ राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ :-

इस अध्याय में…  

आज़ाद हिंदुस्तान के सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीय एकता और अखंडता की थी। आज़ाद हिंदुस्तान राजनीति के इतिहास की इस चर्चा की शुरुआत हम इन्हीं चुनौतियों के जिक्र से करेंगे। इस अध्याय में हम देखेंगे कि कैसे 1947 के बाद के पहले दशक में राष्ट्र-निर्माण की चुनौती से सफलतापूर्वक निपटा गया :

 

★ नए राष्ट्र की चुनौतियाँ :-

● सन् 1947 के 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को हिंदुस्तान आज़ाद हुआ।

● स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस रात संविधान सभा के एक विशेष सत्र को संबोधित किया था।

 

◆ प्रसिद्ध भाषण :-

● यह प्रसिद्ध भाषण ‘भाग्यवधू से चिर-प्रतीक्षित भेंट’ या ‘ट्रिस्ट विद् डेस्टिनी’ के नाम से जाना जाता है।

● हिंदुस्तान की जनता इसी क्षण की प्रतीक्षा कर रही थी।

● हमारी आज़ादी की लड़ाई में कई आवाज़ें बुलंद थीं।

 

 

◆ दो बातों पर सबकी सहमति थी :-

1.पहली बात यह कि आज़ादी के बाद देश का शासन लोकतांत्रिक सरकार के जरिए चलाया जाएगा।

2. दूसरी यह कि सरकार सबके भले के लिए काम करेगी। इस शासन में गरीबों और कमज़ोरों का खास खयाल रखा जाएगा।

 

★ राष्ट्र-निर्माण की तीन चुनौतियाँ  :-

1. एकता के सूत्र में बँधे रखना :- एक ऐसे भारत को गढ़ने की थी जिसमें भारतीय समाज की सारी विविधताओं के लिए जगह हो। यहाँ विभिन्न भाषा, संस्कृति और धर्मो के अनुयायी रहते थे, इन सभी को एकजुट करने की चुनौती थी

2. लोकतंत्र को कायम करना :- संविधान में मौलिक अधिकारों की गारंटी दी गई है और हर नागरिक को मतदान का अधिकार दिया गया है। भारत ने संसदीय शासन पर आधारित प्रतिनिधित्वमूलक लोकतंत्र को अपनाया।

3. समूचे समाज का विकास :- संविधान में यह बात साफ़ कर दी गई थी कि सबके साथ समानता का बरताव किया जाए और सामाजिक रूप से वंचित तबकों तथा धार्मिक-सांस्कृतिक अल्पसंख्यक समुदायों को विशेष सुरक्षा दी जाए।

 

 

★ द्वि-राष्ट्र सिद्धांत :-

● भारत के विभाजन का सबसे प्रमुख कारण “द्वि-राष्ट्र सिद्धांत” था जिसकी मांग “मुस्लिम लीग” ने की थी ।

● इस सिद्धांत के अनुसार भारत किसी एक कौम का नहीं बल्कि हिंदू और मुस्लिम दोनों कौम का देश था और इसी कारण मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए एक नए राष्ट्र यानी पाकिस्तान की मांग की थी

 

◆ अब्दुल गफ्फार खाँ :-

● ब्रिटिश इंडिया का मुस्लिम बहुल प्रत्येक इलाका पाकिस्तान में जाने को राजी नहीं था। पश्चिमोत्तर सीमाप्रांत के नेता खान – अब्दुल गफ्फार खाँ जिन्हें ‘सीमांत गांधी’ के नाम से जाना जाता है, वह ‘द्वि – राष्ट्र सिद्धांत’ के एकदम खिलाफ थे ।

 

◆ ब्रिटिश इंडिया का स्वरूप :-

● ब्रिटिश प्रभुत्व वाले प्रांत :- ब्रिटिश प्रभुत्व वाले भारतीय प्रांतों पर अंग्रेजों का सीधा कब्जा था।

● देशी रजवाड़े :- दूसरी तरफ छोटे बड़े आकार के कुछ और राज्य थे, जिन्हें रजवाड़ा कहा जाता था रजवाड़ों पर राजाओं का नियंत्रण होता था।
 

 

 

★ विभाजन की प्रक्रिया :-

 जिस भू-भाग को ‘इंडिया’ के नाम से जाना जाता था उसे ‘भारत’ और ‘पाकिस्तान’ नाम के दो देशों के बीच बाँट दिया जाएगा। यह विभाजन दर्दनाक तो था ही. इस पर फ़ैसला करना और अमल में लाना और भी कठिन था। धार्मिक बहुसंख्या को विभाजन का आधार बनाया जाएगा। जिन इलाकों में मुसलमान बहुसंख्यक थे वे इलाके ‘पाकिस्तान’ के भू-भाग होंगे और शेष हिस्से ‘भारत’ कहलाएँगे।

 

1. पहली समस्या :- ‘ब्रिटिश इंडिया’ में कोई एक भी इलाका ऐसा नहीं था जहाँ मुसलमान बहुसंख्यक हो ऐसे दो इलाके में जहाँ मुसलमानों की आबादी ज्यादा थी। एक इलाका पश्चिम में था तो दूसरा इलाका पूर्व में ऐसा कोई तरीका न था कि इन दोनों इलाकों को जोड़कर एक जगह कर दिया जाए। इसे देखते हुए फैसला हुआ कि पाकिस्तान में दो इलाके शामिल होंगे यानी पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान तथा इनके बीच में भारतीय भू-भाग का एक बड़ा विस्तार रहेगा।

2. दूसरी समस्या :- मुस्लिम बहुल हर इलाका पाकिस्तान में जाने को राजी हो, ऐसा भी नहीं था। खान अब्दुल गफ्फार खान पश्चिमोत्तर सीमाप्रांत के निर्विवाद नेता थे। उनकी प्रसिद्धि ‘सीमांत गाँधी’ के रूप में थी और के ‘द्वि-राष्ट्र सिद्धांत’ के एकदम खिलाफ़ थे। संयोग से, उनकी आवाज को अनदेखी की गई और ‘पश्चिमोत्तर सीमाप्रांत’ को पाकिस्तान में शामिल मान लिया गया।

3. तीसरी समस्या :- ‘ब्रिटिश इंडिया’ के मुस्लिम बहुल प्रांत पंजाब और बंगाल में अनेक हिस्से बहुसंख्यक गैर-मुस्लिम आबादी वाले थे। ऐसे में फ़ैसला हुआ कि इन दोनों प्रांतों में भी बँटवारा धार्मिक बहुसंख्यकों के आधार पर होगा और इसमें जिले अथवा उससे निचले स्तर के प्रशासनिक इलाकों को आधार माना जाएगा।।

 4. चौथी समस्या :- विभाजन की सबसे अबूझ कठिनाई ‘अल्पसंख्यकों’ की थी। सीमा के दोनों तरफ़ ‘अल्पसंख्यक’ थे। जो इलाके अब पाकिस्तान में हैं वहाँ लाखों की संख्या में हिंदू और सिख आबादी थी। ठीक इसी तरह पंजाब और बंगाल के भारतीय भू-भाग में भी लाखों की संख्या में मुस्लिम आबादी थी।

 

 

 ◆ अच्छा। तो मुझे अब पता चला कि… 

● पहले जिसे ‘पूर्वी’ बंगाल कहा जाता था वही आज का बांग्लादेश है।

● तो क्या यही कारण है कि हमारे वाले बंगाल को ‘पश्चिमी’ बंगाल कहा जाता है।

 

 

★ विभाजन के परिणाम :-

● सन् 1947 में बड़े पैमाने पर एक जगह की आबादी दूसरी जगह जाने को मजबूर हुई थी।

● आबादी का यह स्थानांतरण आकस्मिक, अनियोजित और त्रासदी से भरा था।

● मानव – इतिहास के अब तक ज्ञात सबसे बड़े स्थानांतरणों में से यह एक था।

● लोगो को मजबूरन अपना घर छोड़कर सीमा पार जाना पड़ा

● बड़े स्तर पर हिंसा का शिकार होना पड़ा

● अमृतसर और कोलकाता में सांप्रदायिक दंगे हुए।

● लोगों को मजबूरन शरणार्थी शिविर में रहना पड़ा

● औरतों को अगवा किया गया जबरन शादी करनी पड़ी धर्म बदलना पड़ा ।

● कई मामलों में लोगों ने परिवार की इज्जत बचाने के लिए खुद घर की बहू बेटियों को मार डाला ।

● वित्तीय संपदा के साथ-साथ टेबल कुर्सी टाइपराइटर और पुलिस के भी बंटवारे हुए ।

● 80 लाख लोगों को घर छोड़कर उनके सीमा पर आना पड़ा ।

● 5 से 10 लाख लोगों अपनी जान गवाई |

 

 

 ★ रजवाड़ों का विलय :-  ब्रिटिश इंडिया दो हिस्सों में था।

● एक हिस्से में ब्रिटिश प्रभुत्व वाले भारतीय प्रांत थे ब्रिटिश प्रभुत्व वाले भारतीय प्रांतों पर अंग्रेजी सरकार का सीधा नियंत्रण था।

● दूसरे हिस्से में देसी रजवाड़े ठगे जिनमें छोटे-बड़े आकार के कुछ और राज्य थे। इन्हें रजवाड़ा कहा जाता था। रजवाड़ों पर राजाओं का शासन था।

 

 

 ★ रजवाड़ो की समस्या :- 

● आज़ादी के समय अंग्रेज़ो ने ऐलान किया की भारत के साथ ही सभी देसी रजवाड़े भी ब्रिटिश राज से आज़ाद हो जायेंगे।

● सभी रजवाड़ो को अधिकार दिया गया की वह या तो भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकते है या अपना स्वतन्त्र अस्तित्व बनाये रख सकते है।

● यह फैसला लेने का अधिकार रजवाड़ो के राजाओ को दिया गया यही से सारी समस्या शुरू हुई।

● विभाजन से हुए विध्वंस के बाद मौजूद सबसे बड़ी समस्या थी सभी 565 देसी रजवाड़ो का भारत का में विलय करके अखंड भारत का निर्माण करना।

● इस प्रक्रिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

 

★ सरदार वल्लभ भाई पटेल और राष्ट्रीय एकता :-

● रजवाड़ो को शामिल करने के लिए भारत सरकार का तरीका लचीला था। सरकार द्वारा सामन्य बातचीत और बल प्रयोग दोनों तरीको को ज़रूरत अनुसार अपनाया गया।

 

★ इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन :-

● रजवाड़ों के विलय के लिए एक सहमति पत्र का निर्माण किया गया। इस सहमति पत्र को ही इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन कहते है । इस पर हस्ताक्षर करने का मतलब था की रजवाड़े भारत में शामिल होने के लिए तैयार है ।

● इन देशी रियासतों की संख्या लगभग 565 थी।

● रियासतों के शासकों को मनाने – समझाने में सरदार पटेल (गृहमंत्री) ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

● अधिकतर रजवाड़ो को उन्होंने भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी किया था।

● अधिकतर रजवाड़ों के शासकों ने भारतीय संघ में अपने विलय के एक “सहमति पत्र ” पर हस्ताक्षर कर दिये थे इस सहमति पत्र को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन” कहा जाता है ।

जूनागढ़, हैदराबाद, कश्मीर और मणिपुर की रियासतों का विलय बाकी रियासतों की तुलना में थोड़ा कठिन साबित हुआ ।

● ज्यादातर रजवाड़े भारत में शामिल होने के लिए राज़ी हो गए पर कुछ रजवाड़ो को भारत में शामिल करने में समस्याएँ आई

● सभी रजवाड़ों को भारत में शामिल करने का श्रेय सरदार वल्लभ भाई पटेल को जाता है

● उनकी सूझबूझ और राजनीतिक ज्ञान के द्वारा उन्होंने सभी रजवाड़ों को मना कर भारत में शामिल करवाया और अखंड भारत बनाने में अहम योगदान दिया

● उनके इन्हीं योगदानों की वजह से महात्मा गांधी द्वारा उन्हें लौह पुरुष की उपाधि दी गई और साथ मंत्री बने साथ वह देश के पहले गृह मंत्री बने।

★ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) :-

● वर्तमान दौर में सरकार द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल के सम्मान में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया गया जो कि विश्व के कुछ सबसे बड़े स्टैच्यू में से एक है

● सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के पहले उप- प्रधानमंत्री थे।

● इन्होंने देसी रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

● इसलिए इन्हें भारत का ‘लौह पुरुष’ (Iron Man of India) भी कहा जाता है।

● यह भारत के प्रथम गृह मंत्री (Home Minister) भी थे।

 

 

★ भारतीय रजवाड़ों का स्वरूप :-

● ओडिशा 26 रजवाड़े

● छत्तीसगढ़ 15 रजवाड़े

● सौराष्ट्र 14 बड़े रजवाड़े 119 छोटे रजवाड़े

 

 

 ★ हैदराबाद :-

● आज़ादी के समय हैदराबाद भारत की सबसे बड़ी रिसायत में से एक था।

● इसके शासक को निजाम कहा जाता था। निज़ाम उस समय दुनिया के कुछ सबसे आमिर लोगो में से एक था।

● निज़ाम चाहता था की हैदराबाद भारत से अलग रहे और आज़ाद रियासत बने पर हैदराबाद में रहने वाले लोग उसके शासन लोग खुश नही थे।

● जिस वजह से हैदराबाद के लोगो ने निज़ाम के खिलाफ आंदोलन करने शुरू किये।

● यह सब देख कर एवं इस विद्रोह को रोकने के लिए निज़ाम ने रज़ाकारों को भेजा

● रजाकार निजाम के सैनिको को कहा जाता था। जाकारों ने लूटपाट, हत्या और बलात्कार किये ।

● लोगो पर हो रहे इस अत्याचार को देखते हुए सितम्बर 1948 में भारतीय सेना ने हैदराबाद पर आक्रमण की किया ताकि सामान्य जनता को रजाकारों से बचाया जा सके।

● यह युद्ध काफी दिनों तक चला और अंत में निज़ाम को हार माननी पड़ी और इस तरह हैदराबाद भारत का अंग बन गया।

 

 

 ★ मणिपुर :-

● मणिपुर भारत के पूर्व में स्तिथ एक रियासत था यह के राजा थे बोध चंद्र सिंह

● लोगो के दवाब के कारण राजा को जून 1948 में चुनाव करवाने पड़े और इस तरह से मणिपुर में संवैधानिक राजतन्त्र को स्थापना हुई और भारत में सबसे पहले मणिपुर में ही सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार को अपना कर चुनाव हुए।

● भारत में पूर्ण रूप से शामिल होने की बात को लेकर मणिपुर की विधानसभा में बहुत मतभेद थे।

●कांग्रेस चाहती थी की मणिपुर पूरी तरह से भारत में शामिल हो जाये पर बाकि पार्टिया ऐसा नहीं चाहती थी

● अगर विधानसभा में भारत से अलग रहने का प्रस्ताव पास हो जाता तो मणिपुर को भारत में शामिल कर असंभव हो जाता इसी को देखते हुए भारतीय सरकार ने मणिपुर के राजा पर दवाब बनाया और उनसे पूर्ण विलय पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए इस तरह मणिपुर भारत का अंग बन गया।

● मणिपुर के लोगो को यह सही नहीं लगा और वहाँ की जनता काफी लम्बे समय तक इस फैसले से नाराज़ रही ।

 

 

★ जम्मू एवं कश्मीर :-

● भारत के सबसे उत्तरी हिस्से पर जम्मू एवं कश्मीर राज्य स्थित है।

● आजाद होने से पहले जम्मू और कश्मीर रियासत हुआ करता था जिसके राजा हरि सिंह थे।

● राजा हरि सिंह स्वत्नंत्र रहना चाहते थे जबकि पाकिस्तान कहता था कि जम्मू कश्मीर में मुस्लिम जनसंख्या ज्यादा है इसीलिए जम्मू कश्मीर को पाकिस्तान में शामिल किया जाना चाहिए।

● इस मांग को देखते हुए पाकिस्तान ने आजादी के तुरंत बाद 1947 में जम्मू कश्मीर पर कब्जा करने के मकसद से जम्मू कश्मीर पर हमला किया।

● जम्मू कश्मीर के राजा हरी सिंह ने भारत से मदद मांगी और भारत ने उनकी मदद की

● इसी दौरान जम्मू कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत के विलय पत्र यानी इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सप्रेशन पर हस्ताक्षर किए और अधिकारिक तौर से जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया

● इसी दौरान यह भी कहा गया कि जब स्थिति सामान्य हो जाएगी तो वहां पर जनमत संग्रह कराया जाएगा कि वहां के लोग किस देश में शामिल होना चाहते हैं।

 ● 1947 में हुए युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्से पर कब्जा कर लिया था जिसे पाकिस्तान आजाद कश्मीर कहता है और भारत द्वारा इसे POK यानी Pakistan Occupied Kashmir कहा जाता है

● पर यह जनमत संग्रह आज तक नहीं कराया गया और जम्मू कश्मीर को धारा 370 के तहत विशेष अधिकार दिए गए

 

 

 

★ वर्तमान में जम्मू कश्मीर की स्थिति :-

2019 में सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया गया और जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया।

● वर्तमान में जम्मू कश्मीर को 2 केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया है।

 

 

 ★ कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन :-

● कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन 1920 में हुआ था।

● अधिवेशन बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह मान लिया था कि राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर होगा।

 

 

★ राज्यों का पुनर्गठन :-

● भारत का विभाजन तो हो गया और भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्र अस्तित्व में भी आए परंतु अभी भी राष्ट्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी और इसके साथ देसी रियासतों का भी भारतीय संघ में विलय कर दिया गया परंतु सबसे बड़ा सवाल यह था की क्या राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का समापन हो गया तो इसका उत्तर है नहीं क्योंकि अभी स्वतंत्र भारत के समक्ष भारतीय प्रांतों की आंतरिक सीमाओं को निर्धारित करने की चुनौती अभी मौजूद थी।

 

1. भारत के समक्ष प्रांतों की सीमाओं को निर्धारित करने की चुनौती :-

● प्रांतों की सीमाओं को इस प्रकार निर्धारित करने की चुनौती थी कि देश की भाषाई और सांस्कृतिक बहुलता स्पष्ट रूप से दिखाई दें और साथ ही राष्ट्रीय एकता भी खंडित ना हो।

2. औपनिवेशिक शासन के समय प्रांतों की सीमाओं का निर्धारण:-

● प्रशासनिक सुविधा के लिहाज से प्रांतों की सीमाओं का निर्धारण किया जाता था। रामपुर की सीमा किस बात से भी निर्धारित की जाती थी कि किसी रजवाड़े के अंतर्गत कितना क्षेत्र शामिल है।

3. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नेताओं की चिंता :-

● नेताओं को चिंता हुई कि अगर भाषा के आधार पर प्रांत बनाए गए तो इससे अव्यवस्था पैदा होगी और देश के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है।

 

 

★ भाषा के आधार पर भारत का पहला राज्य :-

● (आंध्र प्रदेश) पुराने मद्रास में तेलुगु भाषी क्षेत्र में विरोध उठा ।

● मद्रास में वर्तमान के तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल, कर्नाटक राज्य है

● यह विशाल आंदोलन आंध्र प्रदेश के नाम का एक अलग राज्य की मांग को लेकर था।

● तेलुगु भाषी क्षेत्र को अलग कर के आंध्रप्रदेश बनाया गया।

● कांग्रेस नेता पोट्टी श्रीरामलू भूख हड़ताल पर बैठ गए।

● 56 दिन के बाद उनकी मौत हो गई हिंसक आंदोलन घटनाएं लोग सड़क पर आ गए विधायकों ने इस्तीफा दे दिया।

● अंत में नेहरू जी ने आंध्रप्रदेश की मांग को स्वीकार कर लिया।

 

 

◆ पोट्टी श्रीरामलू कौन थे ?

● कांग्रेस के नेता और दिग्गज गांधी बागी 56 दिनों की भूख हड़ताल के बाद उनकी मृत्यु हो गई अर्थात जिसके उपरांत आंध्र प्रदेश का गठन किया गया था।

 

★ राज्य पुनर्गठन आयोग :-

● 22 दिसम्बर 1953 में केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के भूतपूर्व न्यायाधीशफजल अली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया ।

● इस आयोग के अन्य सदस्य – हृदयनाथ कुंजरू और केएम पाणिक्कर थे।

● इस आयोग ने 30 दिसंबर 1955 को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

 

 

★ राज्य पुनर्गठन आयोग की प्रमुख सिफारिशें :-

● भारत की एकता व सुरक्षा की व्यवस्था बनी रहनी चाहिए।

● राज्यों का गठन भाषा के आधार पर किया जाए।

● भाषाई और सांस्कृतिक सजातीयता का ध्यान रखा जाए।

● वित्तीय तथा प्रशासनिक विषयों की ओर उचित ध्यान दिया जाए।

● त्रिस्तरीय ( भाग ABC ) राज्य प्रणाली को समाप्त किया जाए।

● केवल 3 केन्द्रशासित क्षेत्रों (अंडमान और निकोबार, दिल्ली, मणिपुर ) को छोड़कर बाकी के केन्द्रशासित क्षेत्रों को उनके नजदीकी राज्यों में मिला दिया जाए।

● राज्यों की सीमा का निर्धारण वहाँ पर बोली जाने वाली भाषा होनी चाहिए।

● इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सन् 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ।

● इस अधिनियम के आधार पर 14 राज्य और 6 केन्द्रशासित प्रदेश बनाए गए।

 

 

★ राज्य पुनर्गठन का परिणाम :-

● इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1955 में प्रस्तुत की।

● इसके आधार पर संसद मेंराज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 पारित किया गया |

● देश को 14 राज्यों एवं 6 संघ शासित क्षेत्रों में बाँटा गया।

 

◆ 14 राज्यों के नाम

1. आंध्रप्रदेश

2. असम

3. बिहार

4. बंबई

5. केरल

6. मध्य प्रदेश

7. मद्रास

8. मैसूर

9. उड़ीसा

10. पंजाब

11. राजस्थान

12. उत्तर प्रदेश

13. बंगाल

14. जम्मू कश्मीर

 

◆ 6 केन्द्रशासित प्रदेशों के नाम

1. दिल्ली,

2. हिमाचल प्रदेश,

3. मणिपुर,

4. त्रिपुरा,

5. अंडमान और निकोबार,

6. लक्षद्वीप, मिनी कॉय और अमीन द्वीप शामिल किया गया था।

 

 

◆संघ शासित क्षेत्र जो बाद में राज्य बने

1.मिजोरम

2.मणिपुर

3.त्रिपुरा

4.गोवा आदि

 

 

 ★ नए राज्यों का निर्माण :-

• 1960 -गुजरात और महाराष्ट्र

• 1963 – में नागालैंड

• 1966 – में पंजाब हरियाणा और हिमाचल प्रदेश

• 1972 – में मेघालय

• 1977 में अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम

• 2000 में झारखंड, उत्तराखंड (उत्तरांचल) और छत्तीसगढ़

• 2014 में तेलंगाना राज्य बना।

 

 

● द्वि-राष्ट्र सिद्धान्त :- द्वि-राष्ट्र सिद्धान्त की बात मुस्लिम लीग ने की थी। इस सिद्धान्त के अनुसार भारत किसी एक कौम (जाति) का नहीं बल्कि ‘हिन्दू’ और ‘मुसलमान’ नाम की दो कौमों का देश था और इसी कारण मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए एक अलग देश अर्थात् पाकिस्तान की माँग की थी।

 

धर्मनिरपेक्ष राज्य :- धर्मनिरपेक्ष राज्य से आशय एक ऐसे राज्य से है जो धर्म के आधार पर नागरिकों में कोई भेदभाव नहीं करता तथा उसका दृष्टिकोण सर्वधर्म सम्भाव होता है। भारतीय संविधान द्वारा देश में धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना की गयी है अर्थात् राज्य और धर्म का क्षेत्र अलग-अलग है।

● अलगाववाद :- जब एक समुदाय या सम्प्रदाय संकीर्ण भावना से ग्रस्त होकर अलग एवं स्वतंत्र राज्य बनाने की माँग करे तो उसे अलगाववाद कहा जाता है। अलगाववादी हमेशा हिंसात्मक आन्दोलन का ही सहारा लेते हैं, जैसे-पंजाब में खालिस्तान के लिए आन्दोलन।

 

● पं. जवाहरलाल नेहरू :- स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।

● मुहम्मद अली जिन्ना :- पाकिस्तान के निर्माता। इन्होंने भारत विभाजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया।

● महात्मा गाँधी :- सत्य-अहिंसा के पुजारी, भारत को अंग्रेजी दासता से स्वतंत्र कराने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

● सरदार वल्लभ भाई पटेल :- स्वतंत्र भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री व प्रथम गृहमंत्री। इनके नेतृत्व में ही देसी रियासतों का भारत में विलय हुआ।

● खान अब्दुल गफ्फार खाँ :- ‘सीमांत गाँधी’ के नाम से प्रसिद्ध। द्वि-राष्ट्र सिद्धान्त के विरोधी थे। ये पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रान्त के निर्विवाद नेता थे।

 

 

 

●अमृता प्रीतम :- पंजाबी भाषा की प्रमुख कवयित्री और कथाकार। जीवन के अन्तिम समय तक पंजाबी की साहित्यिक पत्रिका ‘नागमणि’ का सम्पादन किया।

● पोट्टी श्रीरामुलु :- गाँधीवादी कार्यकर्ता। आन्ध्र प्रदेश नाम से अलग राज्य बनाने की माँग को लेकर आमरण अनशन किया। 15 दिसम्बर 1952 ई. को अनशन के दौरान ही मृत्यु हो गयी।

● फैज अहमद फैज :- प्रसिद्ध कवि विभाजन के पश्चात पाकिस्तान में ही रहे। ‘नक्शे फरियादी’ ‘दस्त-ए-सबा’ तथा ‘जिंदानामा’ इनके प्रमुख कविता संग्रह थे। वामपंथी रुझान के कारण इनका पाकिस्तानी सरकार से अन्तिम समय तक टकराव बना रहा।

 

अध्याय 2: एक दल के प्रभुत्व का दौर

 

 

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