अध्याय : 6 नागरिकता / Citizenship

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नागरिकता जिसमे हम नागरिकता विदेशी जन्मजात नागरिकता राज्यप्रदत नागरिकता इकहरी नागरिकता दोहरी नागरिकता जन्मजात नागरिक का निर्धारण के नियम नागरिकता प्राप्त करने के तरीके संविधान का भाग-2 (अनुच्छेद 5-11) नागरिकता नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 आदि के बारे में पढ़ेंगे।

 

★ नागरिकता :- 

★ नागरिकता से अभिप्राय एक राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता से है जिसमें कोई भेदभाव नहीं होता। राष्ट्रों ने अपने सदस्यों को एक सामूहिक राजनीतिक पहचान के साथ ही कुछ अधिकार भी दिए है। इसलिए हम सबंद्ध राष्ट्र के आधार पर स्वंय को भारतीय, जापानी या जर्मन कहते हैं।

● अधिकतर लोकतांत्रिक देशों में नागरिकों को अभिव्यक्ति का अधिकार, मतदान या आस्था की स्वतंत्रता, न्यूनतम मजदूरी या शिक्षा पाने का अधिकार शामिल किए जाते हैं।

● नागरिक आज जिन अधिकारों का प्रयोग करते है उन्हें उन्होंने एक लंबे संघर्ष के बाद प्राप्त किया है जैसे 1789 की फ्रांसीसी क्रांति, दक्षिण अफ्रीका में समान नागरिकता प्राप्त करने के लिए लंबा संघर्ष आदि ।

नोट:- नागरिकता से संबंधित प्रावधानों का वर्णन संविधान के तीसरे खंड तथा संसद द्वारा तत्पश्चात पारित कानूनों से हुआ हैं।

 

★ नागरिकता :-

◆ सवैधानिक प्रावधान :- नागरिकता को संविधान के तहत ‘संघ सूची में सूचीबद्ध किया गया है और इस प्रकार यह संसद के अनन्य अधिकार क्षेत्र में है। संविधान ‘नागरिक’ शब्द को परिभाषित नहीं करता है, लेकिन नागरिकता के लिये पात्र व्यक्तियों की विभिन्न श्रेणियों का विवरण भाग 2 (अनुच्छेद 5 से 11) में दिया गया है।

● भारतीय नागरिकता का अधिग्रहण :- वर्ष 1955 का नागरिकता अधिनियम, नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीकों का उल्लेख करता है, जिसमें जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण और क्षेत्र का समावेश शामिल है।

● नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 :-अधिनियम में वर्ष 2015 से पहले भारत में प्रवेश करने वाले अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू, सिख, बौद्धों, जैन, पारसियों तथा ईसाइयों के लिये नागरिकता में तेज़ी लाने हेतु कानून में संशोधन किया गया।भारतीय नागरिकता के लिये आवेदन करने से पहले उनके लिये कम-से-कम 11 वर्ष तक भारत में रहने की आवश्यकता को घटाकर पाँच वर्ष कर दिया गया है।

 

 ◆ नागरिकता का प्रावधान :-

● भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है।

● USA में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है।

● स्विट्जरलैंड में तिहरी नागरिकता का प्रावधान है।

 

★ नागरिकता के प्रकार :-

1. जन्मजात नागरिकता :- वह नागरिकता जिसमें किसी व्यक्ति को राज्य में जन्म के आधार पर प्राप्त हो जन्मजात नागरिकता कहते है ।

2. राज्यप्रद्त नागरिकता :- जब किसी व्यक्ति को राज्य द्वारा किसी विशेष परिस्थितियों के कारण नागरिकता प्रदान की गयी हो तो इसे राज्यप्रदत नागरिकता कहते है |

3. इकहरी नागरिकता :- वह नागरिकता जो कोई देश अपने नागरिको को प्रदान करता है जिसमे वह किसी भी राज्य का बासी हो परन्तु वह नागरिक कहलाता है

4. दोहरी नागरिकता :- जब किसी व्यक्ति को देश कि भी और प्रान्त कि भी नागरिकता प्राप्त हो तो उसे धोरी नागरिकता कहते है उद- अमेरिका, फ्रांस

 

★ जन्मजात नागरिक का निर्धारण के नियम :-

इसका निर्धारण दो नियमों के द्वारा होता है –

(i) रक्त संबंध का सिद्धांत :- माता-पिता जिस देश के नागरिक हो बच्चे को उसी देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है चाहे उसका जन्म विदेश में हुआ हो या स्वदेश में भारत, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, इटली, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में नागरिकता की इसी प्रकार की व्यवस्था है

(ii) जन्म स्थान का सिद्धांत :- इस नियम के अनुसार किसी व्यक्ति की नागरिकता उसके जन्म-स्थान के आधार पर किया जाता है | किसी राज्य के सीमाओं के अंदर जन्में बच्चे को उस राज्य की नागरिकता प्राप्त हो जाती है | माता पिता चाहे किसी भी देश के नागरिक हो | उदाहरण – अर्जेंटीना (दक्षिण अमेरिका) ब्रिटेन और अमेरिका आदि |

 

◆ नागरिकता प्राप्त करने के तरीके :-

1. विवाह के आधार पर

2. लंबे निवास के आधार पर

3. गोद लेने पर

4. संपत्ति खरीदने पर

5. सरकारी सेवा

6. विद्वान् होने पर

 

◆ नागरिकता त्याग के तरीके :-

1. त्याग पत्र

2. विवाह कर लेने पर

3. अनुपस्तिथि

4. विदेश में नौकरी

5. देश द्रोह

 

 

★ नागरिक एवं विदशी में अंतर

◆ नागरिक

1.निवास :- ये स्थाई होते हैं।

2. अधिकार :- इनकों सभी राजनितिक अधिकार प्राप्त होते हैं।

3.कर्तव्य :- इन्हें राज्य के सभी क़ानूनी कर्तव्यों का पालन अनिवार्य होता है।

4. प्रतिबंध : इन्हें राज्य में घूमने व निवास पर कोई प्रतिबंध नहीं होता।

◆ विदेशी

1.निवास :- ये अस्थाई होते हैं।

2. अधिकार :- इनकों सिर्फ सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं।

3. कर्तव्य :- ये अपने मूल देश के प्रति ही वफादार होते है और अन्य देश के क़ानूनी कर्तव्यों के पालन के लिए वाध्य नहीं है।

4.प्रतिबंध :- इन्हें एक निश्चित समयसीमा, जगह में निवास करना होता है।

 

 

★ सार्वभौमिक नगारिकता :-

हम यह मान लेते हैं कि किसी देश की पूर्ण सदस्यता उन सबको उपलब्ध होनी चाहिए जो सामान्यतः उस देश के निवासी है, वहां काम करते या जो नागरिकता के लिए आवदेन करते हैं किंतु नागरिकता देने की शर्तें सभी तय करते हैं। अवांछित नागरिकता से बाहर रखने के लिए राज्य ताकत का इस्तेमाल करते हैं परंतु फिर भी व्यापक स्तर पर लोगों का देशांतरण होता है।

 

★ विश्व नागरिकता :-

आज हम एक ऐसी दुनिया में रहते है जो आपस में एक दूसरे से जुड़ा है संचार के साधन, टेलिविजन या इंटरनेट ने हमारे संसार को समझने के ढंग में भारी परिवर्तन किया है। एशिया की सुनामी या बड़ी आपदाओं के पीड़ितों की सहायता के लिए विश्व के सभी भागों से उमड़ा भावोद्वार विश्व समाज की उभार को ओर इशारा करता है। इसी को विश्व नागरिकता कहा जाता है। यही ‘ विश्व ग्राम’ व्यवस्था का आधार भी है।

 

 

 ★ नागरिकों के दायित्व :-

नागरिकों के दायित्व को उसके कर्तव्य से जोड़ा गया है प्रत्येक नागरिक के कुछ कर्तव्य होते हैं जिसे नागरिकों से पालन की जाने कि अपेक्षा की जाती है जो निम्न लिखित हैं :-

(i) देश की रक्षा करना और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करना |

(ii) करों, उपकारों तथा आयकर आदि का भुगतान करना |

(iii) विवादों का समाधान समझौता, बातचीत और न्यायिक प्रक्रिया के द्वारा करना और बल प्रयोग से न करना |

(iv) कानून का पालन करना और कानून लागु करने वाली एजेंसियों की सहायता करना |

(v) चुनाव में भाग लेना और सरकार की गतिविधियों पर निगरानी रखना |

 

 

 ★ नागरिक और राष्ट्र :-

● राष्ट्र राज्य की अवधारणा का विकास आधुनिक काल में हुआ है।

● राष्ट्र राज्य की सम्प्रभुता एवं नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का दावा सर्वप्रथम 1789 ई. में फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने किया था।

● एक लोकतांत्रिक राज्य की राष्ट्रीय पहचान में नागरिकों को ऐसी राजनीतिक पहचान देने की कल्पना की जाती है, जिसमें राज्य के सभी सदस्य (नागरिक) भागीदार हो सकें।

● ‘भारत स्वयं को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश मानता है।

● भारत के संविधान ने नागरिकता की लोकतांत्रिक एवं समावेशी धारणा को अपनाया है।

● भारत में जन्म, वंश-परम्परा, पंजीकरण, देशीकरण अथवा किसी भूक्षेत्र के राजक्षेत्र में सम्मिलित होने से नागरिकता प्राप्त की जा सकती है।

 

 

★ समान अधिकार :-

● भारत में नागरिकता के सन्दर्भ में आज शहरी गरीबों से सम्बन्धित समस्या उन अति आवश्यक समस्याओं में से एक है, जो सरकार के समक्ष खड़ी है।

● भारत के प्रत्येक शहर में गंदी बस्तियों में रहने वाले लोगों की समस्याएँ शहर के अन्य लोगों से भिन्न होती हैं।

● हमारे देश में आदिवासी एवं वनवासी भी अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी जीवन पद्धति एवं आजीविका खतरे में पड़ती जा रही है।

● आज देश व सम्बन्धित राज्यों की सरकारें इस प्रश्न से जूझ रही हैं कि वे देश के विकास को खतरे में डाले बगैर आदिवासियों और वनवासियों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे करें।

● वैश्विक स्थिति, अर्थव्यवस्था और समाज में बदलाव नागरिकता के अर्थ और अधिकारों की नई व्याख्या की माँग करते

● समान नागरिकता की अवधारणा का अर्थ यह है कि सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं सुरक्षा प्रदान करना राजकीय नीतियों का एक मार्गदर्शक सिद्धान्त हो।

 

 

★ प्रवासी :-

● काम की तलाश में लोग एक शहर से दूसरे शहर तथा देश से दूसरे देश की ओर की ओर जाते है, तब वे प्रवासी कहलाते है

● निर्धन प्रवासियों का अपने-अपने क्षेत्रों में उसी प्रकार स्वागत नहीं होता जिस प्रकार कुशल और दौलतमंद प्रवासियों का होता है।

● प्रतिवाद (विरोध) का अधिकार हमारे संविधान में नागरिकों के लिए सुनिश्चित की गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक पहलू है बशर्ते इससे दूसरे लोगों या राज्य के जीवन और संपत्ति को क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।

 

 

 ★ प्रतिवाद ( विरोध) के तरीके:-

● नागरिक समूह बनाकर, प्रदर्शन कर के मीडिया का इस्तेमाल कर राजनीतिक दलों से अपील कर या अदालत में जाकर जनमत और सरकारी नीतियों को परखने और प्रभावित करने के लिए स्वतंत्र है।

● समान अधिकारः शहरों में अधिक संख्या झोपड़पट्टियों और अवैध कब्जे की भूमि पर बसे लोगों की हैं। ये लोग हमारे बहुत काम के है इनके बिना एक दिन भी नहीं गुजारा जा सकता जैसे सफाईकर्मी, फेरीवाले, घरेलू नौकर नल ठीक करने वाले आदि।

● सरकार, स्वंय सेवी संगठन भी इन लोगों के प्रति जागरूक हो रहे है। सन 2004 में एक राष्ट्रीय नीति बनाई गई जिससे लाखों फुटपाथी दुकानदारों को स्वतंत्र कारोबार चलाने का बल प्राप्त हुआ।

● इसी प्रकार एक और वर्ग है जिसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है वह है आदिवासी और वनवासी समूह ये लोग अपने निर्वाह के लिए जंगल और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते हैं

● नागरिकों के लिए समान अधिकार का अर्थ है नीतियाँ बनाते समय भिन्न-भिन्न लोगों की भिन्न-भिन्न जरूरतों का तथा दावों का ध्यान रखना।

 

 

★ विस्थापन के कारण :- युद्ध, अकाल, उत्पीड़न

◆ शरणार्थी का अर्थ :- विस्थापन के कारण जो लोग न तो घर लौट सकते है और न ही कोई देश उन्हें अपनाने को तैयार होता है तो वे राज्यविहीन या शरणार्थी कहलाते हैं ।

 

★ नागरिक और विदेशी :

◆ भारत में भी अन्य आधुनिक राज्यों की तरह दो प्रकार के लोग हैं ।

◆ नागरिक और विदेशी नागरिक – नागरिको को भारतीय राज्य की ओर से कुछ’ विशेषाधिकार प्राप्त होते है और उनकी इस पर पूर्ण श्रद्धा होती है। जैसे-

● धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर विभेद के विरुद्ध अधिकार ( अनुच्छेद- 15)

● लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता ( अनुच्छेद – 16 )

● वाक् व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ( अनुच्छेद- 19)

● संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार ( अनुच्छेद 29 व 30 )

● मतदान का अधिकार

● संविधानिक पदों पर नियुक्ति का अधिकार (राष्ट्रपति, उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्ययाधीश )

● चुनाव लड़ने का अधिकार

◆ विदेशी – यह किसी अन्य राज्य के नागरिक होते है, इसलिए उन्हें सभी – नागरिक और राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं।

 

 

★ संविधान का भाग-2 (अनुच्छेद 5-11) नागरिकता :-

 ● भारत के संविधान के भाग-2 (अनुच्छेद 5-11) भारत की नागरिकता से संबंधित है।

● संविधान (26 नवंबर, 1949) के प्रारंभ में अनुच्छेद 5 भारत की नागरिकता के बारे में है।

 

 ◆ संविधान के प्रारम्भ पर नागरिकता :-

●  अनुच्छेद 5 :- भारत की नागरिकता के बारे में है।

● यदि कोई व्यक्ति भारत में जन्मा हो तो वह भारत का नागरिक होगा ।

● यदि उसके माता – पिता भारत में जन्में हो ।

● उसके माता – पिता में से कोई भी एक भारत में जन्मा हो।

● यदि कोई व्यक्ति संविधान लागू होने से पूर्व लगातार 5 वर्षो तक भारत में रहा हो , तो वह भारतीय नागरिक होगा ।

 

 2. भारतीय नागरिकता :-

● अनुच्छेद 6 :- पाकिस्तान से भारत आने वाले व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार के बारे में है।

● वे लोग जो 19 July 1948 तक या उससे पहले भारत में आ गए हो भारतीय नागरिक होंगे।

● वे लोग जो 19 July 1948 के बाद भारत में आए उन्हें भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन देना होगा।

● ऐसे व्यक्ति को पंजीकृत के लिए 6 महीने तक भारत में निवास आवश्यक है।

 

 3. पाकिस्तान में प्रवास करने पर नागरिकता :-

● अनुच्छेद 7 :- पाकिस्तान में प्रवास करने वाले व्यक्तियों की नागरिकता के बारे में उपबंध करता है।

● 1मार्च 1947 के पश्चात भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हो गया हो ।

● लेकिन बाद में 19 July 1948 से पहले भारत वापस आ गए , तो वे भारतीय नागरिक बन सकते हैं।

 

4. भारत में जन्मा हो परन्तु विदेश में रहता हो :-

● अनुच्छेद 8 :- विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों के लिए नागरिकता के सम्बन्ध में प्रावधन किया गया हैं।

● ऐसे व्यक्ति जो भारत सरकार अधिनियम 1935 (Government of India Act, 1935) के अंतर्गत भारत के नागरिक थे , तो वे भारत के नागरिक होंगे

● देश में भारत के राजनयिक प्रतिनिधि के यहाँ भारतीय नागरिकता के लिए रजिस्ट्रीकरण करा रखा हो।

 

5. विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर भारत का नागरिक ना होना :-

● अनुच्छेद 9 :- यदि कोई व्यक्ति दूसरे देश की नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वत: ही समाप्त हो जाएगी।

 

 6. नागरिकता के अधिकारों का बने रहना :-

● अनुच्छेद 10 :- प्रत्येक व्यक्ति जो भारत का नागरिक हैं।

● संसदीय विधि के अधीन भारत का नागरिक बना रहेगा।

● संसदीय विधान के अतिरिक्त किसी अन्य रीति से , छीना नही जा सकता।

 

7. संसद द्वारा संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार को नियंत्रित करने के लिए कानून :-

● अनुच्छेद 11 :- संसद को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह नागरिकता के अर्जन व समाप्ति के तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी कानून बना सकती है।

● संसद द्वारा भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 पारित किया गया है।

●जिसमें 1986 , 1992 , 2003 , 2005 , 2015 , एवं 2019 में संशोधन किया गया है।

 

★ नागरिकता अधिनियम :-

◆ इस अधिनियम के अनुसार, भारतीय नागरिकता निम्नलिखित पाँच प्रकार से प्राप्त की जा सकती है-

1.जन्म से (By Birth) :- कोई व्यक्ति जिसका जन्म 26 जनवरी, 1950 को या उसके पश्चात् भारत में हुआ हो, या उसके -पिता में से कोई भी भारतीय नागरिक होना चाहिए।

● इस विधि के दो अपवाद हैं-

● यह विधि वहाँ लागू नहीं होती जहाँ जन्म के समय शिशु का पिता किसी दूसरे देश या शत्रु देश का राजनयिक हो।

● शत्रुओं के अधीन भारत के किसी भाग में उत्पन्न होने वाले बच्चे ।

 

2. वंश परम्परा से (By Desent) :-

● भारत के बाहर किसी अन्य देश में 26 जनवरी, 1950 ई. को या उसके बाद जन्म लेने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक हो सकता है, यदि उसके जन्म के समय उसके माता या पिता में से कोई भी भारत का नागरिक हो।

 

3. पंजीकरण से (By Registration) :-

● भारत में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति यदि भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत होना चाहता है तो उसे भारत में लगातार 5 वर्ष तक रहने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा।

● ऐसा व्यक्ति जिसका जन्म भारत में हुआ हो किन्तु जो भारत के बाहर किसी अन्य देश में निवास कर रहा हो।

● भारतीय नागरिकों के साथ विवाह करने वाली स्त्रियाँ । उपर्युक्त सभी पंजीकरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त कर सकता है।

(4) देशीयकरण से (By Naturalisation) : – कोई विदेशी व्यक्ति जो वयस्क है तथा एक वर्ष से भारत में निवास कर रहा है, भारत सरकार से देशीयकरण का प्रमाण-पत्र प्राप्त कर भारत का नागरिक बन सकता है किन्तु इसके लिए निम्न शर्तें अनिवार्य हैं-

(i) वह जिस देश का नागरिक है, उसकी नागरिकता का त्याग।

(ii) वह उस देश का नागरिक नहीं होना चाहिए, जहाँ देशीयकरण द्वारा भारतीय नागरिकों को नागरिकता लेने से रोका जाता है।

(iii) उसका चरित्र अच्छा होना चाहिए। (iv) आठवीं अनुसूची में उल्लेखित किसी एक भाषा का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए।

(v) वह राज्य निष्ठा की शपथ ग्रहण करे।

 

 

 ● अपवाद :- यद्यपि देशीकरण से नागरिकता प्राप्ति के लिए उपर्युक्त योग्यताएँ आवश्यक हैं किन्तु यदि केन्द्रीय सरकार की राय में आवेदक ऐसा व्यक्ति है जिसमें विज्ञान, दर्शन, कला, साहित्य, विश्व शांति या साधारणतः मानव प्रगति के निमित्त विशिष्ट सेवा की है तो ऐसे व्यक्ति को विनिर्दिष्ट शर्तें पूरी न करने पर भी नागरिकता प्रदान की जा सकती है।

 

5. भूमि के अर्जन द्वारा (By Acquisition of Land) :-

● यदि भारत सरकार द्वारा किसी नये भू-भाग को अर्जित कर भारत में उसका विलय किया जाता है तो उस क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों को स्वतः भारत की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। जैसे-गोवा, दमन और दीव, पुडुचेरी तथा सिक्किम ।

● इस सम्बन्ध में निम्न आदेश जारी हुए हैं :

(i) दादरा नागर और हवेली (नागरिकता) आदेश, 1962
(ii) गोवा, दमण और दीव (नागरिकता) आदेश, 1962
(iii) पुडुचेरी (नागरिकता) आदेश, 1962
(iv) सिक्किम (नागरिकता) आदेश, 1975

 

 

★ नागरिकता का अन्त :-

◆ किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता की समाप्ति निम्न तीन प्रकार से हो सकती है :-

(1) परित्याग (Renunciation) :- कोई भी भारत का वयस्क नागरिक घोषणा करके अपनी नागरिकता का परित्याग कर सकता है। यदि उसने अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर ली है। यह एक स्वैच्छिक कार्य है।

(2) पर्यावसान (Termination) :- भारत का वह नागरिक जिसने देशीयकरण अथवा रजिस्ट्रीकरण द्वारा स्वेच्छा से भारत की नागरिकता स्वीकार की थी तथा किसी दूसरे देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है तो उसकी नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।

(3) वंचित किया जाना (Deprivation ) :- भारत सरकार निम्न में से किसी आधार पर किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता से वंचित कर सकता है-

• यदि नागरिकता फर्जी तरीके से प्राप्त की गई हो।

• युद्ध के समय शत्रुओं की सहायता करने वाले व्यक्तियों को। भारतीय नागरिक के द्वारा दूसरे देश के स्त्री-पुरुष के साथ विवाह करने पर ।

•  लगातार 7 वर्ष तक भारत के बाहर रहने पर।

 

★ विदेशी निवासियों के लिए भारतीय नागरिकता :-

1. अनिवासी भारतीय (Non Resident Indians-NRI) :-

● ऐसे भारतीय नागरिक जो नौकरी या व्यवसाय के उद्देश्य से वर्ष में 182 दिन अथवा उससे अधिक समयावधि तक विदेशों में रहते हैं और भारतीय पासपोर्ट धारण करते हैं, अनिवासी भारतीय (NRI) कहलाते हैं।

● UNO तथा अन्य विदेशी नियुक्तियों पर भारत सरकार द्वारा भेजे जाने वाले व्यक्तियों को भी अनिवासी भारतीय का दर्जा प्रदान किया जाता है। इन्हें नागरिकता सम्बन्धी सभी सुविधाएँ- आर्थिक, वित्तीय तथा शैक्षणिक सुविधाएँ प्राप्त हैं। इन्हें नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि ये भारतीय नागरिक ही हैं।

 

2. भारतीय मूल के व्यक्ति (Person of Indian Origin- PIO) :-

● वे लोग जो स्वयं अथवा जिनके पूर्वज कभी भारत के नागरिक थे, लेकिन वर्तमान में ये लोग किसी दूसरे देश के नागरिक बन गए हैं।

●ऐसे व्यक्तियों को जिनके पास कभी भी भारत का पासपोर्ट रहा है और जिनके माता-पिता, दादा-दादी अथवा नाना-नानी में से कोई भी भारत शासन अधिनियम 1935 के अन्तर्गत भारत का निवासी रहा हो उस व्यक्ति को भारतीय मूल का व्यक्ति (PIO) माना जाता है। वर्ष 2015 में इसे समाप्त करके इसका विलय समुद्र पारीय नागरिकता (OCI) में कर दिया गया।

 

3. भारत के समुद्र पारीय नागरिक (Overseas Citizen of India (OCI) :-

● दिसम्बर, 2003 में लक्ष्मीमल सिंघवी समिति की सिफारिश पर भारत सरकार द्वारा समुद्र पारीय नागरिकता (OCI) का प्रारम्भ 2005 से किया गया है।

● ऐसा व्यक्ति जो भारतीय संविधान लागू होने के समय अथवा उसके पश्चात् कभी भी भारत का नागरिक रहा हो अथवा भारतीय संविधान लागू होने के समय भारतीय नागरिक बनने की योग्यता रखता था । वह व्यक्ति जो दूसरे देश का नागरिक है, लेकिन भारत के किसी ऐसे क्षेत्र से सम्बन्ध रखता है, जो 15 अगस्त, 1947 के बाद भारत का अंग बन गया। इन योग्यताओं को धारण करने वाले व्यक्ति के पुत्र-पुत्री, पोता- पोती अथवा नाती नातिन को भी ओ.सी.आई. कार्ड जारी किया जा सकता था।

 

 4. भारत के कार्डधारक विदेशी नागरिक (Overseas Citizens of India Cardholder) :-

●नागरिक (संशोधन) अधिनियम, 2015 द्वारा नागरिकता अधिनियम, 1955 में 2005 में हुए संशोधन की जगह नये संशोधन कर ‘विदेशी भारतीय नागरिक’ (O.C.I.) की जगह भारत के कार्डधारक विदेशी नागरिक (O.C.I.C.) का प्रावधान किया गया।

● इसके तहत भारत सरकार इन कार्डधारकों को अधिकार दे सकती है किन्तु इन्हें अनुच्छेद 16, 58, 66, 124, 217 और मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है। यद्यपि इन्हें चिकित्सा, वकालत, सी.ए. और ऑल इंडिया प्री मेडिकल परीक्षा आदि में समानता का अधिकार प्रदान किया गया है। • इस प्रकार-

(i) अप्रवासी भारतीय (NRI) – ऐसा भारतीय नागरिक जो साधारणतः भारत के बाहर निवास करता है और जिसके पास भारतीय पासपोर्ट है।

(ii) भारतीय मूल का व्यक्ति (P.I.O.)- एक व्यक्ति जो स्वयं की बुनियादी आ अथवा जिसका कोई पूर्वज भारतीय नागरिक था और जो वर्तमान में अन्य देश की नागरिकता/राष्ट्रीयता धारक है और वह विदेशी पासपोर्ट धारक है।

(iii) भारत का कार्डधारक विदेशी नागरिक (OCIC) – एक व्यक्ति जो नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7क के तहत् ओ.सी.आई.सी. के रूप में पंजीकृत है।

 

 

★ भारत में पासपोर्ट का रंग :- 

• भारत के नागरिक को जारी पासपोर्ट नीले रंग का होता है, जबकि भारत के कार्डधारक विदेशी नागरिक (OCIC) को जारी पहचान पत्र हरे रंग का और भारत में रहने वाले तिब्बती शरणार्थियों को विदेश जाने पर अशोक स्तम्भ लगे पीले रंग का पहचान पत्र जारी किया जाता है।

 

★ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (Citizenship amendment act, 2019 )

•10 दिसम्बर, 2019 को लोकसभा द्वारा और 11 दिसम्बर, •2019 को राज्यसभा द्वारा पारित होने के बाद 12 दिसम्बर, 2019 को नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात् एक अधिनियम बन गया जो 10 जनवरी, 2020 से प्रभावी भी हो गया।

• इस संशोधन अधिनियम के तहत (तीनों देशों) बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत में आने वाले हिन्दू, सिक्ख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई (6 धर्मों ) धर्म वाले लोगों (चाहे वे वैध तरीके से आए या अवैध) को नागरिकता देने का प्रावधान है।

• इस अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि इन पड़ोसी देशों के उपर्युक्त अल्पसंख्यक यदि 5 साल से भारत में रह रहे हैं तो अब भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं। पूर्व में 11 साल रहने का प्रावधान था। इस प्रकार 31 दिसम्बर, 2014 को या इससे प्रवेश पूर्व करने वाले ऐसे शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल सकेगी।

• इस अधिनियम में उक्त देशों को मुस्लिम बहुल देश होने के कारण वहाँ के मुस्लिम शरणार्थियों को अल्पसंख्यक न मानते हुए नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं किया गया।

• संविधान की छठी अनुसूची में शामिल असम, मेघालय, मिजोरम या त्रिपुरा के कुछ आदिवासी क्षेत्रों या आन्तरिक रेखा (Inner line) परमिट के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों यानी अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैण्ड पर यह लागू नहीं होता है।

• अधिनियम में एक अन्य प्रावधान यह भी किया गया कि यदि कोई ओ.सी.आई. कार्डधारक ने केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी कानून का उल्लंघन करता है तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

 

भारत में नागरिकता – अनुच्छेद 5,6,7,8,9,10 और 11 | Citizenship in India | 

अध्याय : 7 राष्ट्रवाद / Nationalismin

 

 

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