अध्याय 9 : भारतीय राजनीती : नए बदलाव / Recent Developments in Indian Politics

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1990 का दशक गठबंधन का युग संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन कांग्रेस का पतन गठबंधन की राजनीति अन्य पिछड़ा वर्ग का राजनीतिक उदय मंडल का लागू होना आयोध्या विवाद बाबरी मस्जिद शाहबानो केस

 

★ भारतीय राजनीती : नए बदलाव :-

 

★ 1990 का दशक :- 1990 के पश्चात भारतीय राजनीति में सामाजिक , आर्थिक व राजनीतिक स्तर पर कई बदलाव देखे गए जिन्होंने भारतीय राजनीति की दशा व दिशा को बदलने का काम किया।

 

◆ 1990 के बाद प्रमुख बदलाव :-

1. मंडल मुद्दा
2.अयोध्या विवाद
3.नई आर्थिक नीति
4.गठबंधन के दौर की शुरुआत
5. कांग्रेस के प्रभुत्व की समाप्ति

 

1. मंडल मुद्दा :-

● 1990 में राष्ट्रीय मोर्चा की नयी सरकार ने नौकरियों में ‘ अन्य पिछड़ा वर्ग ‘ को आरक्षण दिया जाएगा।

● सरकार के इस फैसले से देश के विभिन्न भागों में मंडल -विरोधी हिंसक प्रदर्शन हुए।

● अन्य पिछड़ा वर्ग को मिले आरक्षण के समर्थक और विरोधियों के बीच चले विवाद को ‘ मंडल मुद्दा ‘ कहा जाता हैं।

 

2. अयोध्या विवाद :-

● अयोध्या स्थित एक विवादित ढाँचे ( बाबरी मस्जिद के रूप में प्रसिद्ध ) के विध्वंस के रूप में हुई।

● इस घटना से भारतीय राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता पर बहस तेज़ हो गई।

● इन बदलावों के संबंध भाजपा के उदय और हिंदुत्व की राजनीति से है।

● 1991 में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई और इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में परिवर्तन हुआ।

 

3. नई आर्थिक नीति :-

● विभिन्न सरकारों ने इस दौर में जो आर्थिक नीतियाँ अपनायी , वे बुनियादी तौर पर बदल चुकी थी।

● इसे ढाँचागत समायोजन कार्यक्रम अथवा नए आर्थिक सुधार के नाम से जाना गया।

● आजादी के बाद से अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था जिस दिशा में चलती आई थी , वह इन नए आर्थिक सुधारों के कारण मूलगामी अर्थों में बदल गई।

 

 4. गठबंधन के दौर की शुरुआत :-

● 1989 के आम चुनावों में किसी दल को बहुमत प्राप्त नही हुआ।

● भारतीय राजनीति में केंद्रीय स्तर पर गठबंधन के युग का आरंभ हुआ।

● संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) कांग्रेस और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ( NDA) बीजेपी।

 

5. कांग्रेस प्रणाली की समाप्ति :-

● 1989 के आम चुनावों के बाद कांग्रेस की हार के साथ भारत की दलीय व्यवस्था से उसका प्रभुत्व समाप्त हो गया।

● बहुदलीय शासन-प्रणाली का युग शुरू हुआ।

● अब केंद्र में गठबंधन सरकारों के निर्माण में क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ गया।

 

 

नई आर्थिक नीति :-

● 1991 में श्री पी. बी. नरसिम्हाराव के नेतृत्व वाली सरकार ( जिसके वित्तमंत्री डा. मनमोहन सिंह थे ) ने देश में नई आर्थिक नीति लागू की जिसे बाद में आने वाली सभी सरकारों ने जारी रखा। इस नीति में अर्थव्यवस्था के उदारीकरण और निजीकरण पर बल दिया गया ।

 

मंडल मुद्दा :-

● 1978 में जनता पार्टी सरकार ने दूसरे ‘ पिछड़ा आयोग का गठन किया। इसके अध्यक्ष विन्देश्वरी प्रसाद मंडल थे इसलिए इसे मंडल आयोग के नाम से जाना जाता है

● मंडल आयोग की मुख्य सिफारिशें :-

अन्य पिछड़ा वर्ग OBC को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण |

● भूमि सुधारों को पूर्णता से लागू करना

● 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री वी. पी. सिंह की सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की।

● इसके खिलाफ देश के विभिन्न भागों में मंडल विरोधी हिंसक प्रदर्शन हुए।

 

 

★ अयोध्या विवाद:-

● 16 वीं सदी में मीर बाकी द्वारा अयोध्या में बनवाई मस्जिद के बारे में कहा गया कि यह मस्जिद मंदिर को तोड़कर बनवाई गई।

● यह मामला अदालत में गया और 1940 के दशक में ताला लगा दिया गया।

● बाद में जब ताला खुला तो इस मुद्दे पर वोट बैंक की राजनीति हुई 6 दिसम्बर 1992 को मस्जिद का ढांचा तोड़ दिया गया।

● इससे कारण देश में साम्प्रदायिक हिंसा फैली और 1993 में मुम्बई में दंगे हुई। विवाद की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन किया गया ।

 

 

◆ गोधरा कांड :-

● 26 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में कारसेवकों की बोगी में आग लग गयी. यह संदेह करके कि बोगी में आग मुस्लिमों में लगाई होगी।

● अगले दिन गुजरात में बड़े पैमाने पर मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा हुई । यह एक महीने चला और 1100 व्यक्ति मारे गए।

 

 

◆ सहमति के मुद्दे :-

विभिन्न दलों में बढ़ती सहमति के मुद्दे निम्न हैं :

1. नई आर्थिक नीति पर सहमति

2. पिछड़ी जातियों के राजनीतिक और सामाजिक दावों की स्वीकृति

3. क्षेत्रीय दलों की भूमिका एवं साझेदारी को स्वीकृति ।

4. विचारधारा की जगह कार्यसिद्धि पर जोर

 

 

★ नई आर्थिक नीति (1991) :- नरसिम्हा राव की सरकार द्वारा 1991 में नई आर्थिक नीति को अपनाया गया।

● उस दौर में भारत के नई आर्थिक नीति के मुख्य तीन पहलू थे।

1. उदारीकरण (Liberalisation) :- उदारीकरण के द्वारा सरकार व्यापार करने की नीतियों को सरल बनाना चाहती थी जिससे देश के अंदर व्यापार बड़े और विकास की गति में तेजी आए

2. निजीकरण (Privatisation) :- निजीकरण का अर्थ- सरकारी कंपनियों को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपना ताकि उनकी उत्पादकता और कार्य क्षमता को बढ़ाया जा सके

3. वैश्वीकरण (Globalisation) :- वैश्वीकरण के द्वारा सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था से जोड़ने के प्रयास किए जिस वजह से देश में वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह में वृद्धि हुई और विकास की गति में तेजी आई

 

 

★ एक दलीय :-

◆ पहला आम चुनाव 1952 :-

● चुनावो में कांग्रेस ने 364 सीट जीती और सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी।

◆ दुसरा आम चुनाव 1957 :-

●1957 में भारत में दूसरे आम चुनाव हुए इस बार भी स्तिथि पिछली बार की तरह ही रही और कांग्रेस ने लगभग सभी जगह आराम से चुनाव जीत लिए लोक सभा में कांग्रेस को 371 सीटे मिली।

◆ तीसरा आम चुनाव 1962 :-

● 1962 में भारत में तीसरा आम चुनाव हुआ जिसमें कांग्रेस ने लोक सभा में 361 सीटे जीती ।

 

 

★ दो दलीय व्यवस्था :-

● जनता पार्टी :-

● 1951 जनसंघ पार्टी की स्थापना श्याम प्रसाद मुखर्जी ने की।

● 1977 में विपक्षी पार्टियों के साथ जनसंघ के विलय के साथ जनता पार्टी अस्तित्व में आई।

● जनता पार्टी ने आपातकाल की ज्यादतियों को मुद्दा बनाकर चुनावों को उस पर जनमत संग्रह का रूप दिया।

● 1977 के चुनाव में कांग्रेस को लोकसभा में 154 सीटें मिली।

● जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों को 330 सीटें मिली।

● जनता पार्टी की सरकार में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और चरण सिंह व जगजीवन राम दो उपप्रधानमंत्री बनें

● 1977 में भारत में दो दलीय व्यवस्था कायम हुआ।

 

 

 

★ बहुदलीय व्यवस्था :-

● 1989 के चुनावों के बाद गठबंधन का युग आरंभ हुआ।

● चुनावों के बाद जनता दल और कुछ क्षेत्रीय दलों को मिलाकर बने राष्ट्रीय मोर्चे ने भाजपा और वाम मोर्चे के समर्थन से गठबंधन सरकार बनायी।

 

★ गठबंधन के युग की शुरुआत :-

● 1989 के चुनावों के बाद गठबंधन का युग आरंभ हुआ।

● 1991 के बाद देश में किसी भी एक पार्टी को लोकसभा चुनावो में पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल हो गया।

● इसी वजह से देश में गठबंधन के युग की शुरुआत हुई

 

 

● देश में मुख्य दो गठबंधन बने

1. कांग्रेस संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ) UPA / ( United Progressive Alliance )

2. भाजपा राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ) / NDA (National Democratic Alliance)

 

 

★ बीजेपी का उदय :-

● 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जन संघ की स्थापना की।

● 1977 में विपक्षी पार्टियों ने मिलकर जनता पार्टी का गठन किया।

● 1980 में जनता पार्टी टूट गई और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में ‘ भारतीय जनता पार्टी ‘ बनी।

● 1984 के लोकसभा चुनाव में दो सीटें आई।

● 1986 में बीजेपी की कमान सख्त छवि वाले लालकृष्ण आडवाणी के हाथ में आई।

1989 में लोकसभा में 85 सीटों पर जीत मिली। और बीपी सिंह के नेतृत्व में नेशनल फंट की सरकार को समर्थन दिया।

 ● 1991 में बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और पुनः चुनाव हुए। इस बार बीजेपी को 120 सीटों पर जीत मिली।

1996 में 165 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी। हालांकि पूर्ण बहुमत नही जुटा पाने के कारण वाजपेयी के नेतृत्व में बनी सरकार मात्र 13 दिन में गिर गई।

1998 में बीजेपी ने 182 सीटों पर जीत हासिल की। बीजेपी की अगुवाई वाले राजग ने केंद्र में सरकार बनाई। वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार 13 महीने चली।

1999 में बीजेपी को फिर 182 सीटें मिली और राजग ने 303 सीटों पर जीत हासिल की। वाजपेयी के नेतृत्व में फिर सरकार बनी और इसने कार्यकाल पूरा किया।

 ● 2004 में भारत उदय अभियान बुरी तरह विफल रहा। राजग को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा । बीजेपी को मात्र 138 सीटें मिली।

2009 में राजग को फिर हार मिली। 116 सीटों के साथ बीजेपी मुख्य विपक्षी दल रही।

● 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने शानदार वापसी की। पार्टी ने अकेले 282 सीटों पर जीत हासिल करते हुए बहुमत के आंकड़े (272) को पार कर लिया। राजग को 336 सीटों पर जीत मिली । नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला।

2019 में सभी चुनावों को झुठलाते हुए बीजेपी ने पिछली बार से भी बेहतर प्रदर्शन किया। पार्टी को 303 सीटें और राजग को कुल 353 सीटें मिली । मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।

● 17 राज्य में बीजेपी और उसके गठबंधन की सरकारें हैं। इसके अलावा केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में भी बीजेपी की सरकार हैं।

 

 

★ विकास व शासन :-

2014 के पश्चात भारतीय राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन जाति व पंथ आधारित राजनीति का विकास व सुशासन उन्मुख राजनीति की ओर स्थानांतरण है।

‘सबका साथ, सबका विकास’ के अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्य के साथ, राजग सरकार ने विकास तथा सुशासन को जनता के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक आर्थिक कल्याणकारी योजनांए प्रारंभ की है।

● जैसे प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, स्वच्छ भारत अभियान, जन धन योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, किसान फसल बीमा योजना, ‘बेटी पढ़ाओं, देश बढ़ाओं’ योजना, आयुष्मान भारत योजना आदि ।

 ● इन सभी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को केन्द्र सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभार्थी बनाकर सामान्य जन के द्वार तक प्रशासन पहुंचाना रहा है। विभिन्न राज्यों के मतदाता — समुदायों, लिंग तथा क्षेत्रों से ऊपर उठकर विकास और सुशासन के विषयों को केन्द्रीय मंच पर लाने में सफल हुए।

 

 

 ★ विभिन्न सामाजिक आर्थिक कल्याणकारी योजना :-

1. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना :- इसकी शुरुआत 1 मई 2016 को हुई। इसमें ग्रामीण और वंचित परिवारों के लिए खाना पकाने के, स्वच्छ ईधन (LPG) को उपलब्ध कराना है।

2. स्वच्छ भारत अभियान :- यह आभियान भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2014 में प्रारंभ किया गया । इस अभियान का उदेश्य खुले में शौच की समस्या को समाप्त करना व कचरे का सही निपटान करना है।

3. जन-धन योजना :- यह योजना 28 अगस्त 2014 को प्रारंभ हुई। इस योजना के अंतर्गत देश के गरीन लोगों के बैंक में या पोस्ट ऑफिस में खाते खोलकर उन्हें बैंकिंग सुविधा का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

4. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना :- इस योजना का प्रारंभ वर्ष 2015 है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों का विद्युतीकरण, किसानों को पर्याप्त बिजली पहुंचाना व अन्य उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

5. किसान फसल बीमा योजना :- यह योजना वर्ष 2016 में प्रारंभ हुई। इसके अंतर्गत देश के किसानों को किसी भी प्राकृतिक आपदा के कारण फसल में बर्बादी होने पर बीमा प्रदान किया जाता है।

6. बेटी पढ़ाओ, देश बढ़ाओ :- यह कार्यक्रम वर्ष 2015 में शुरू की गई। इस कार्यक्रम के तहत बेटियों की शिक्षा, विकास प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया जाता है। लोगों को यह समझाने का भी प्रयास है कि हमारी बेटियाँ घर ही नहीं देश भी चला सकती है।

7. आयुष्मान भारत भोजना :- यह भारत सरकार की स्वास्थ्य योजना है। इस योजना का उदेश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बीमा मुहैया कराना है। इसकी शुरूआत वर्ष 2018 में की गई।

 

 

 ★ अब तक लोकसभा के सत्रह आम चुनाव हो चुके हैं ।

 

◆ भारत के प्रधानमंत्री को सूची

पहला : 1947 -64 जवाहरलाल नेहरू

दूसरा : 1964 लाल बहादुर शास्त्री

तीसरा : 1966 इंदिरा गांधी

चौथा : 1977 मोरारजी देसाई

पांचवां : 1979 चरण सिंह

छठा : 1980 इंदिरा गांधी

सातवां : 1984 राजीव गांधी

आठवां : 1989 वी.पी. सिंह

नौवां : 1990 चंदशेखर

दसवीं : 1991नरसिम्हा राव

ग्यारहवीं : 1996 अटल बिहारी

बारहवीं : 1997 एच. डी. देवेगौड़ा

तेरहवीं : 1997 इंद्रकुमार गुजराल

चौदहवां : 1999 अटल बिहारी वाजपेयी

पंद्रहवां : 2004 – 2014 मनमोहन सिंह

सोलहवां : 2014 नरेन्द्र मोदी

सत्रहवें : 2019 नरेन्द्र मोदी

अठारवा :

 

 

 

 

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