अध्याय : 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियां और पुनर्स्थापन / challenges to and restoration of the congress system

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कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियां और पुनर्स्थापन एक दलीय वर्चस्व पहला आम चुनाव 1952 दुसरा आम चुनाव 1957 तीसरा आम चुनाव 1962 कांग्रेस के प्रभुत्व के कारण कांग्रेस प्रणाली राजनैतिक उत्तराधिकार जवाहरलाल नेहरू लाल बहादुर शास्त्री इंदिरा गांधी चौथा आम चुनाव 1967 गैर-कांग्रेस वाद कांग्रेस पार्टी में विभाजन कांग्रेस (आर) कांग्रेस (ओ) दो दलीय व्यवस्था जनता पार्टी

 

कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियां और पुनर्स्थापन

 

इस अध्याय में…

● इस किताब के दूसरे अध्याय में आपने कांग्रेस प्रणाली के उद्भव के बारे में पढ़ा था। इस प्रणाली को 1960 के दशक में पहली बार चुनौती मिली। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा गहन हो चली थी और ऐसे में कांग्रेस को अपना प्रभुत्व बरकरार रखने में मुश्किलें आ रही थीं।

◆ विपक्ष अब पहले की अपेक्षा कम विभाजित और कहीं ज़्यादा ताकतवर था । कांग्रेस को इस विपक्ष की चुनौती का सामना करना पड़ा। कांग्रेस को अंदरूनी चुनौतियाँ भी झेलनी पड़ीं, क्योंकि अब यह पार्टी अपने अंदर की विभिन्नता को एक साथ थामकर नहीं चल पा रही थी।

 

 

★ एक दलीय वर्चस्व :-

◆ पहला आम चुनाव 1952 :-

● चुनावो में कांग्रेस ने 364 सीट जीती और सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी।

● दूसरी सबसे बड़ी पार्टी रही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया जिसने 16 सीटें जीती।

● जवाहर लाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने।

 

 

◆ दुसरा आम चुनाव 1957 :-

●1957 में भारत में दूसरे आम चुनाव हुए इस बार भी स्तिथि पिछली बार की तरह ही रही और कांग्रेस ने लगभग सभी जगह आराम से चुनाव जीत लिए लोक सभा में कांग्रेस को 371 सीटे मिली।

● जवाहर लाल नेहरू दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बने पर केरल में कम्युनिस्ट पार्टी का प्रभाव दिखा और कांग्रेस केरल में सरकार नहीं बना पाई।

 

 

◆ तीसरा आम चुनाव 1962 :-

● 1962 में भारत में तीसरा आम चुनाव हुआ जिसमे फिर से ही कांग्रेस बड़े आराम से लगभग सभी जगहों पर चुनाव जीत गई।

● इस चुनाव में कांग्रेस ने लोक सभा में 361 सीटे जीती और जवाहर लाल नेहरू तीसरी बार प्रधानमंत्री बने ।

 

 

★ कांग्रेस के प्रभुत्व के कारण :-

1. प्रसिद्ध नेता
2.सुसंगठित पार्टी
3. सबसे पुराना राजनीतिक दल
4. पार्टी का राष्ट्र व्यापी नेटवर्क
5. स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका
6 सबको समेटकर मेलजोल के साथ चलने की प्रकृति।

 

 

★ कांग्रेस प्रणाली :-

● सामाजिक गठबंधन :- कांग्रेस की प्रकृति एक सामाजिक गठबंधन की है। कांग्रेस में किसान और उद्योगपति , शहर के बाशिंदे और गाँव के निवासी , मजदूर और मालिक एवं मध्य उच्च वर्ग तथा सभी जाति को जगह मिली।

● विचारधारात्मक गठबंधन :- कांग्रेस ने अपने अंदर गरमपंथी और नरमपंथी , दक्षिणपंथी , वामपंथी और मध्यमार्गियो को समाहित किया।

● गठबंधनी स्वभाव :- चुनावी प्रतिस्पर्धा के पहले दशक में कांग्रेस ने शासक-दल की भूमिका निभयी और विपक्ष की भी।

● नेटवर्क स्थानीय स्तर तक :- इसका नेतृवर्ग अब उच्च वर्ग या जाति के पेशेवर लोगों तक ही सीमित नहीं रहा। इसमें खेती-किसानी की बुनियाद वाले तथा गाँव- गिरान की तरफ रुझान रखने वाले नेता भी उभरे।

● सुसंगठित पार्टी :- कांग्रेस एक मंच की तरह थी, जिस पर अनेक समूह, हित और राजनीतिक दल तक आ जुटते थे और राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेते थे।

● स्वाधीनता संग्राम :- आज़ादी से पहले के वक्त में अनेक संगठन और पार्टियों को कांग्रेस में रहने की इजाज़त थी।

 

 

 

★ कांग्रेस दल के प्रभुत्व :-

1. कांग्रेस पहले से ही एक सुसंगठित पार्टी थी।

2. कांग्रेस को ‘अव्वल और एकलौता’ होने का फायदा मिला।

3. इस पार्टी के संगठन का नेटवर्क स्थानीय स्तर तक पहुँच चुका था।

4. उसकी प्रकृति सबको समेटकर मेलजोल के साथ चलने की थी।

5.कांग्रेस पार्टी की सफलता की जड़ें स्वाधीनता संग्राम की विरासत में हैं

 

 

★ राजनैतिक उत्तराधिकार :-

● जवाहरलाल नेहरू
जन्म :- 14 नवंबर 1889 इलाहाबाद (UP)
मृत्यु :- 27 मई 1964 नई दिल्ली
पुरस्कार :- भारत रत्न से सम्मानित
पुत्री :- इंदिरा गांधी

 

पुस्तक :-
1. द डिस्कवरी ऑफ इंडिया (The Discovery of India)
2. एन ऑटोबायोग्राफी (An Autobiography in 1936)

● 1952 , 1957 , 1962 जवाहरलाल नेहरू तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने।

●1964 के मई में नेहरू की मृत्यु हो गई। वे पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से बीमार चल रहे थे।

 

★ लाल बहादुर शास्त्री
जन्म :- 2 अक्टूबर 1904 मुगलसराय (UP)
मृत्यु :- 10 जनवरी 1966 ताशकंद (उज्बेकिस्तान की राजधानी)
पुरस्कार :- भारत रत्न से सम्मानित

● लाल बहादुर शास्त्री जी “जय जवान जय किसान” का नारा दिये।

● शास्त्री जी के समय मुख्य चुनौतियां : 1. खाद्य संकट, 2. पाकिस्तान से युद्ध

● शास्त्री जी 1964 से 1966 तक देश के प्रधानमंत्री रहे।

● 10 जनवरी 1966 को अचानक ताशकंद में उनका देहांत हो गया।

 

● लालबहादुर शास्त्री (1904-1966 ) :- भारत के दूसरे प्रधानमंत्री; 1930 से स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी की।

◆ उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में मंत्री रहे; कांग्रेस पार्टी के महासचिव का पदभार सँभाला।

● 1951-56 तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री पद पर रहे।

● इसी दौरान रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने रेलमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

● बाद में, 1957-64 के बीच भी मंत्री पद पर रहे। 

 

 

◆ इंदिरा गांधी :-

● मोरारजी देसाई और इंदिरा गाँधी के बीच कड़ा मुकाबला था।

● मोरारजी देसाई बंबई प्रांत (मौजूदा महाराष्ट्र और गुजरात) के मुख्यमंत्री के पद पर रह चुके थे। केंद्रीय मंत्रिमंडल में वे मंत्री पद पर भी रह चुके थे।

● जवाहरलाल नेहरू की बेटी इंदिरा गाँधी गुजरे वक्त में कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर रह चुकी थीं। शास्त्री के मंत्रिमंडल में उन्होंने सूचना मंत्रालय का प्रभार सँभाला था।

● कांग्रेस के सांसदों ने गुप्त मतदान किया। इंदिरा गाँधी ने मोरारजी देसाई को हरा दिया। उन्हें कांग्रेस पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने अपना मत दिया था।

● पार्टी के बड़े नेताओं ने इंदिरा गांधी को यह सोच कर समर्थन किया कि इंदिरा गांधी जी के सलाह के अनुसार काम करेगी क्योंकि इंदिरा अनुभव नहीं था।

 

 

 

★ चौथा आम चुनाव 1967 :-

● दो प्रधानमंत्री की मृत्यु हो गई और नए प्रधानमंत्री कम अनुभवी माना गया।

● इसी समय देश में गंभीर आर्थिक संकट, मानसून की असफलता, सूखा खेती की पैदावार में गिरावट, विदेशी मुद्रा की कमी और सैन्य खर्चों में बढ़ोतरी झेलनी पड़ी।

● इंदिरा गांधी कि सरकार के शुरुआती फैसलों में रुपये का अवमूल्यन करना माना गया कि रुपये का अवमूल्यन अमेरिका के दबाव में किया गया पहले के वक्त में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत ₹5 थी जो अब बढ़कर ₹7 हो गई।

● महंगाई बढ़ी, खदान में कमी आई, बेरोजगारी बढ़ी, देश में बंद और हड़ताले हुई।

 

 

● दो युद्धों का सामना

• चीन (1962)
• पाकिस्तान (1965)

● दो बड़े नेताओ की मृत्यु

• जवाहर लाल नेहरू
• लाल बहादुर शास्त्री

 

◆ गैर-कांग्रेस वाद :-

● देश में बिगड़ते माहौल को देखकर विपक्षी सक्रिय हो गए।

● इन दलों को लगा कि इंदिरा गांधी की अनुभव हीनता और कांग्रेस की अंदरूनी उठापटक से उन्हें कांग्रेस को सत्ता से हटाने का एक अवसर हाथ लग गया।

● राम मनोहर लोहिया ने इसे गैर-कांग्रेस वाद का नाम दिया।

● उन्होंने कहा कि कांग्रेस का शासन अलोकतांत्रिक और गरीबों के खिलाफ हैं इसीलिए गैर कांग्रेसी दलों को एक साथ आ जाना चाहिए ताकि लोकतंत्र को वापस लाया जा सके।

● फरवरी 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव हुए इस चुनाव में कांग्रेस को राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर गहरा धक्का लगा।

● इसी चुनाव को कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इसे राजनीतिक भूकंप की संज्ञा दी।

● जैसे तैसे लोकसभा में बहुमत मिला लेकिन सीटें तथा मत कम मिले इतने कम वोट कांग्रेस को कभी नहीं मिले थे।

 

 

 

★ राजनीतिक भूकंप की संज्ञा :-

● 1967 के चुनाव में कांग्रेस को जैसे तैसे लोकसभा में तो बहुमत मिल गया।

● कांग्रेस को केंद्र और राज्य दोनों जगह ही गहरा धक्का लगा।

● कांग्रेस के कई बड़े नेता चुनाव हार गए।

● कांग्रेस 9 राज्यों में सरकार नहीं बना सकी।

● 7 राज्यों में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला।

● 2 राज्यों में दल बदल के कारण कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई।

● ऐसा आजादी के बाद पहली बार हुआ था इसलिए राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इस चुनाव परिणाम को राजनीतिक भूकंप की संज्ञा दी थी

 

◆ नोट :-

● चौथे आम चुनाव में कांग्रेस को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मद्रास (तमिलनाडु), उड़ीसा और केरल में बहुमत नहीं मिला।

● मद्रास (वर्तमान तमिलनाडु) में क्षेत्रीय पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की जीत हुई DMK – हिंदी विरोधी आंदोलन

● हरियाणा के एक विधायक गया लाल 1967 के चुनाव में एक पखवाड़े में तीन पार्टी (कांग्रेस – यूनाइटेड फ्रंट – कांग्रेस) बदली जिसे “आया राम गया राम” कहा गया।

●DMK – द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम

 

 

★ राष्ट्रपति पद का चुनाव :-

● 1969 में राष्ट्रपति चुनाव के समय इंदिरा गांधी और सिंडिकेट के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आ गई।

● तत्कालीन राष्ट्रपति “डॉ जाकिर हुसैन” की मृत्यु हो गई थी।

● सिंडिकेट ने लोकसभा के अध्यक्ष “संजीव रेड्डी” को राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में खड़ा करने में सफलता पाई।

● इंदिरा गांधी और एन संजीव रेड्डी की पहले से अनबन थी।

● इसलिए इंदिरा गांधी ने अपनी ‘वी.वी. गिरी’ को बढ़ावा दिया।

● दोनों गुट राष्ट्रपति पद के चुनाव से अपनी ताकत अजमना चाहते थे।

● एस. निजलिंगप्पा कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा पार्टी उम्मीदवार रेडी को वोट दें इंदिरा गांधी ने कहा अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट डालें।

● अंत में वी.वी. गिरी विजयी हुए, यह स्वतंत्र उम्मीदवार थे संजीव रेड्डी की हार से पार्टी का टूटना तय था।

● कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपनी पार्टी से निष्कासित कर दिया।

 

 

★ कांग्रेस पार्टी में विभाजन :-

◆ कांग्रेस ( O – आर्गेनाईजेशन) पुरानी कांग्रेस सिंडिकेट

● सिंडिकेट :- सिंडिकेट कांग्रेस के अंदर अनुभवी, दिग्गज और प्रभावशाली नेताओं का एक समूह था

● इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में भी सिंडिकेट का महत्वपूर्ण योगदान था

● सिंडिकेट के प्रमुख के. कामराज थे।

 

 

◆ कांग्रेस ( R – रिक्विजिनिस्ट) नई कांग्रेस इंदिरा गाँधी

● ग्रैंड अलायंस :- 1971 के चुनाव के समय सभी बड़ी गैर साम्यवादी और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों द्वारा एक चुनावी गठबंधन तैयार किया गया था जिसे ग्रैंड अलायंस का नाम दिया गया

● इंदिरा गांधी ने सकारात्मक कार्यक्रम रखा और गरीबी हटाओ का नारा दिया।

● ग्रैंड अलायंस ने ‘ इंदिरा हटाओ ‘ का नारा दिया।

 

 

◆ चुनाव के परिणाम :-

● देश में चुनाव हुए और चुनावो के परिणामो ने एक बार फिर से सबको चौका दिया।

● इस चुनाव में कांग्रेस (आर) ने CPI के साथ गठबंधन बनाया था और इन दोनों के गठबंधन ने देश में सबसे ज़्यादा सीट हासिल की।

● गठबंधन को कुल मिलकर 375 सीटे मिली जिसमे से सिर्फ कांग्रेस (आर) को ही 352 सीट मिली ।

● दूसरी तरफ कांग्रेस (ओ) और महाजोट का पूरी तरह सफाया हो गया।

● कांग्रेस (ओ) को केवल 16 सीट मिली।

● ग्रैंड अलायंस सिर्फ 40 सीटे ही जीत सका ।

● इस तरह से कांग्रेस (ओ) और इंदिरा गाँधी ने वापसी की।

 

◆ कांग्रेस (ओ) की जीत के कारण :-

● 14 बैंको का राष्ट्रीयकरण।

● प्रिवी पर्स की समाप्ति।

● भूमि सुधारो को बढ़ावा दिया।

● समाजवादी नीतिया।

● गरीबी हटाओ का नारा।

● इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता।

● देश में गरीबो के हित के लिए नीतिया बनाई।

 

◆ 1960 का खतरनाक दशक :-

● दो युद्धों का सामना

● चीन (1962)

● पाकिस्तान (1965)

● दो बड़े नेताओ की मृत्यु

● जवाहर लाल नेहरू

● लाल बहादुर शास्त्री

● आर्थिक समस्या

● खाद्यान संकट

● विदेशी मुद्रा में कमी

● सैन्य खर्चों में वृद्धि

 

 

★ कांग्रेस का पुनर्स्थापन :-

● कांग्रेस के पुनर्स्थापन से मतलब का अर्थ है कांग्रेस को उसकी पुरानी स्तिथि में ले जाना ।

● 1967 में कांग्रेस को काफी कम वोट और सीटे मिली पर 1971 में इंदिरा गाँधी के नेतृत्व ने कांग्रेस अपनी पुरानी स्तिथि में वापस आई और अपना वही पुराना स्थान प्राप्त किया। इसे ही कांग्रेस का पुनर्स्थापन कहा गया।

 

 

● कांग्रेस के पुनस्थापन की विशेषताएं ।

● इंदिरा की लोकप्रियता पर निर्भर

● पार्टी में उपस्थित अलग अलग गुटों की समाप्ति

● समाजवादी विचारधारा

● गरीबो का कल्याण मुख्य मुद्दा

● पहले से अधिक व्यवस्थित और शक्तिशाली

 

★ प्रिवीपर्स :-

● देसी रियासतों का विलय भारतीय संघ में करने से पहले सरकार ने यह आश्वासन दिया था कि रियासतों के तत्कालीन शासक परिवार को निश्चित मात्रा में निजी सम्पति रखने का अधिकार होगा। साथ ही सरकार की तरफ से उन्हें कुछ विशेष भत्ते भी दिए जायेंगे। इस व्यवस्था को ‘प्रिवीपर्स’ कहा गया।

 

 

 ★ दो दलीय व्यवस्था :-

● जनता पार्टी :-

● 1951 जनसंघ पार्टी की स्थापना श्याम प्रसाद मुखर्जी ने की।

● 1977 में विपक्षी पार्टियों के साथ जनसंघ के विलय के साथ जनता पार्टी अस्तित्व में आई।

● जनता पार्टी ने आपातकाल की ज्यादतियों को मुद्दा बनाकर चुनावों को उस पर जनमत संग्रह का रूप दिया।

● 1977 के चुनाव में कांग्रेस को लोकसभा में 154 सीटें मिली।

● जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों को 330 सीटें मिली।

● जनता पार्टी की सरकार में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और चरण सिंह व जगजीवन राम दो उपप्रधानमंत्री बनें।

● 1977 में भारत में दो दलीय व्यवस्था कायम हुआ।

 

 

 ★ बहुदलीय व्यवस्था :-

● 1989 के चुनावों के बाद गठबंधन का युग आरंभ हुआ।

● चुनावों के बाद जनता दल और कुछ क्षेत्रीय दलों को मिलाकर बने राष्ट्रीय मोर्चे ने भाजपा और वाम मोर्चे के समर्थन से गठबंधन सरकार बनायी।

 

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